पहाड़ों पर घूमनें जाएं तो इन 10 Health Problems से रहें सावधान, जाने टिप्स
पहाड़ों पर यात्रा करते समय altitude sickness, dehydration, sunburn, hypothermia और food poisoning जैसी health problems से कैसे बचें? जानें जरूरी health tips.
पहाड़ किसको अच्छे नही लगते हैं। शहरों की भागदौड से दूर जब पहाड़ की वादियों में हमारा शरीर जाता है तो न केवल आँखों को सुख मिलता है बल्कि हमारे चित्त को भी शान्ति मिलती है। यही कारण है जब भी कहीं घूमने की बात आती है तो लोगों के दिमाग में सबसे पहला ख्याल पहाड़ों का आता है।
वहीं पहाड़ों वाले टूरिस्ट प्लेस ही सबसे ज्यादा पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। हालांकि पहाड़ों में घूमना अच्छा और रोमांटिक लग सकता है लेकिन कभी-कभी पहाड़ी क्षेत्रों में कुछ स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याएं (mountain travel health problems and solutions) भी हो जाती हैं, पहाड़ की वादियों का लुत्फ़ उठाने का मजा किरकिरा हो जाता है।
खासकर अगर आप पहली बार किसी ऊंचे पहाड़ी इलाके में जा रहे हैं या ट्रेकिंग करने की योजना बना रहे हैं, तो आपको कुछ ऐसी स्वास्थ्य समस्याओं के बारे में पहले से जानकारी होना जरूरी है, जैसे कि ऊंचाई बढ़ने पर हवा में ऑक्सीजन का दबाव कम हो जाता है और शरीर को नए वातावरण के साथ तालमेल बैठाने में समय लगता है।
इस आर्टिकल के माध्यम से आज हम कुछ ऐसी हेल्थ प्रॉब्लम के बारे में बताएँगे जो जो पहाड़ घूमने पर हमें परेशान करती हैं और उनका समाधान भी हम इस आर्टिकल में बताएँगे।
1. Altitude Sickness यानी ऊंचाई की बीमारी
पहाड़ की वादियों का लुत्फ़ लेने के दौरान जो सबसे ज्यादा परेशानी आती है वह एक altitude sickness है। इसे Acute Mountain Sickness (AMS) भी कहते हैं।
जब शरीर को कम ऑक्सीजन वाले वातावरण के साथ तालमेल बैठाने में पर्याप्त समय नहीं मिलता है तब यह समस्या होती है। इस दौरान सिरदर्द, थकान, चक्कर, भूख कम लगना, मतली और कभी-कभी उल्टी भी हो सकती है।
अगर आपको altitude sickness के लक्षण नज़र आ रहे हैं तो ज्यादा उंचाई पर न जाएं।
इस समस्या से कैसे बचें?
ऊंचाई पर धीरे-धीरे आराम करते हुए जाएं।
अचानक बहुत ज्यादा ऊंचाई पर पहुंचने से बचें।
पहले 1से 2 दिन शरीर को आराम और वातावरण में ढालने का समय दें।
शुरुआत में बहुत ज्यादा शारीरिक मेहनत न करें।
शराब न पिएं।
अगर आप ज्यादा तेजी से उंचाई पर जाना चाहते हैं तो पहाड़ चढ़ने से पहले ही डॉक्टर से सलाह ले लें।

2. सांस फूलना और गंभीर altitude illness
जैसे-जैसे पहाड़ की ऊंचाई बढती है, सामान्य रूप से चलने से भी हमारी सांस फूलने लग सकती है। अगर सांस लेने में लगातार परेशानी हो, कमजोरी बढ़ती जाए या खांसी के साथ सांस फूलने लगे, तो इसे सामान्य थकान समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
High-Altitude Pulmonary Edema (HAPE) altitude illness का गंभीर रूप है। CDC के अनुसार, इसमें सांस फूलना, कमजोरी और खांसी जैसे लक्षण हो सकते हैं और यह तेजी से जानलेवा स्थिति बन सकती है।
3. Dehydration यानी शरीर में पानी की कमी
ठंडे मौसम में अक्सर प्यास कम महसूस होती है। यही वजह है कि पहाड़ों पर घूमने वाले लोग पर्याप्त पानी पीना भूल सकते हैं। ट्रेकिंग, ज्यादा चलना, तेज धूप और कम नमी की वजह से शरीर में पानी की कमी हो सकती है।
डीहाइड्रेशन से सिरदर्द, कमजोरी, चक्कर आना और थकान जैसी परेशानियां हो सकती हैं। इसलिए ठंड में भी नियमित रूप से पानी पीते रहें।
4. सनबर्न और UV रेडियेशन
पहाड़ों पर अक्सर ठंड होती है, इसलिए हमे लग सकता है कि वहां होने वाली धूप से हमारी त्वचा को कोई नुकसान नहीं होगा लेकिन ऊंचाई वाले क्षेत्रों में UV exposure ज्यादा हो सकता है।
इसलिए पहाड़ों की यात्रा के दौरान सनस्क्रीन लगायें। चश्मा पहनें। टोपी लगाएं। लम्बे समय तक धूप में न रहें। खासकर बर्फीले इलाकों में आंखों और त्वचा को धूप से बचाना और भी महत्वपूर्ण हो सकता है।
5. Hypothermia यानी शरीर का तापमान बहुत कम होना
चूँकि पहाड़ों पर ठण्ड होती है इसलिए बहुत ज्यादा ठंड में लंबे समय तक रहने से शरीर का तापमान जानलेवा स्तर तक गिर सकता है। इस समस्या को hypothermia कहा जाता है।
अग शरीर का तापमान 35°C से नीचे जाता है तो इसे हाइपोथर्मिया (hypothermia) माना जाता है और यह मेडिकल इमरजेंसी हो सकती है। हाइपोथर्मिया होने पर कंपकंपी, ठंडी और पीली त्वचा, बोलने में परेशानी, धीमी सांस, थकान और भ्रम हो सकता है।
इससे बचने के लिए मौसम के अनुसार कई परतों में कपड़े पहनें। गीले कपड़ों में ज्यादा देर तक न रहें और जरूरत पड़ने पर किसी गर्म और सुरक्षित जगह पर चले जाएं।
अगर किसी व्यक्ति में गंभीर हाइपोथर्मिया के लक्षण दिखाई दें, तो डॉक्टर से संपर्क करें। ऐसे व्यक्ति को गर्म और सुरक्षित जगह पर ले जाकर गीले कपड़े हटाकर सूखे कपड़ों या कंबल से ढकना चाहिए।
6. मोशन सिकनेस (Motion Sickness)
पहाड़ी रास्तों पर कई जगह सड़केंबहुत ज्यादा घुमावदार हो जाती हैं। लंबे समय तक कार, बस या टैक्सी में बैठकर ऐसे रास्तों से गुजरने से कुछ लोगों को मोशन सिकनेस हो सकती है।
मोशन सिकनेस जब होता है तो जी मिचलाना, चक्कर आना, उल्टी और बेचैनी जैसी समस्या होती है।
अगर आपको पता है कि मोशन सिकनेस आपको होती है तो तो यात्रा से पहले डॉक्टर या मेडिकल स्टोर से मोशन सिकनेस की दवा ले लें। इसके अलावा यह ध्यान रखें कि यात्रा के दौरान बहुत ज्यादा खाना न खाएं और जरूरत पड़ने पर थोड़ी देर रुक-रुक कर चलें।
7. फ़ूड पॉइजिनिंग (Food Poisoning) और पेट ख़राब होना
पहाड़ों पर घूमते समय वहां के स्थानीय भोजन को खाने की तलब हो सकती है, चूँकि वहां के खाने के अनुसार हमारा पाचन तंत्र नही ढला होता है, और पानी की साफ़-सफाई ने होने से फ़ूड पॉइजिनिंग और पेट ख़राब होने की समस्या हो सकती है। इससे डायरिया, हो सकता है।

जब भी कहीं घूमने जाएं तो निम्न चीजों का ध्यान रखें
साफ और सुरक्षित पानी पिएं
खुले या संदिग्ध पानी से बचें
खाना अच्छी तरह पका हुआ और गर्म खाएं
कच्चे या अधपके भोजन को न खाएं
फल खाने से पहले उन्हें अच्छी तरह धोएं या खुद छीलें
खाने से पहले हाथ जरूर धोएं
8. चोट लगने और गिरने का खतरा
पहाड़ों को घूमते समय हमें न केवल बीमारियों से सावधान रहना होता है बल्कि दुर्घटनाओं से भी बचना होता है। trekking trails, पत्थरीले रास्ते, गीली जमीन, बर्फ और बारिश के कारण फिसलने या गिरने का खतरा भी रहता है।
खासकर अगर पहली बार ट्रेकिंग कर रहे हैं तो सावधानी बरतें और चोट न लगाएं। ज्यादा कठिन रूट से पहाड़ की चढ़ाई न करें।
सावधानी में आप अच्छी grip वाले trekking जूते पहन सकते हैं। अकेले remote trekking करने के बजाय स्थानीय गाइड या भरोसेमंद group के साथ जाना भी कई परिस्थितियों में ज्यादा सुरक्षित हो सकता है।
9. कीड़े मकौड़े और जानवरों का काटना
कुछ पहाड़ी और ग्रामीण इलाकों में मच्छरों, कीड़ों और साँपों के काटने का खतरा हो सकता है। इसके अलावा ट्रेकिंग के दौरान कुत्तों या दूसरे जानवरों के संपर्क में आने से चोट या संक्रमण का खतरा हो सकता है।
अगर किसी जानवर ने काट लिया या खरोंच दिया है, तो घाव को नजरअंदाज न करें और जल्द से जल्द उस पर दवा लगाएं। घूमने जाते समय मेडिकल स्टोर से ऐसी ट्यूब खरीदकर आप अपने पास रख सकते हैं।

पहाड़ों पर घूमने जाने से से पहले Health Checklist
अपने साथ जरूरी दवाईयां रखें
फर्स्ट ऐड किट लेकर चलें
सनस्क्रीन लगाएं
चश्मा और टोपी लेकर चलें
पानी की बोतल न भूलें
गर्म और वाटरप्रूफ कपड़े रखें
पहाड़ के अनुसार जूते पहनकर चलें
मोशन सिकनेस की दवा जरूर लेकर चलें
अपने डॉक्टर का नम्बर जरूर रखें
अगर आपको पहले से कोई हार्ट या फेफड़े से सम्बंधित कोई बीमारी है या कोई दूसरी क्रोनिक समस्या है तो तो ऊंचाई वाले इलाके में जाने से पहले डॉक्टर से कंसल्ट कर लें। क्योंकि इन बीमारियों वाले लोगों को उंचाई पर ज्यादा खतरा हो सकता है।
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पहाड़ों पर कब तुरंत Medical Help लेनी चाहिए?
सिर्फ हल्का सिरदर्द या थकान होने पर घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन कुछ लक्षण गंभीर हो सकते हैं।
अगर किसी व्यक्ति को:
आराम के बावजूद बढ़ती हुई सांस की समस्या हो रही है
बहुत ज्यादा कमजोरी हो रही है
भ्रम हो रहा है
शरीर का संतुलन बिगड़ रहा है
लगातार उल्टी हुई जा रही है
बेहोशी हो रही है
बहुत ज्यादा ठंड लग रही है और कंपकंपी के साथ मानसिक स्थिति में बदलाव हो रहा है
अगर उपरोक्त लक्षण दिखाई दें, तो इसे सामान्य थकान या पहाड़ की समस्या समझकर नज़रअंदाज न करें। पीड़ित व्यक्ति को डॉक्टर के पास पहुंचाकर उसका इलाज करवाएं।









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