What is Stress Eating or Emotional Eating in Hindi

आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में तनाव से पीड़ित होना लाजमी है। तनाव होने से कई सारी समस्याएं होती है फिर चाहे हाई ब्लड प्रेशर की समस्या हो या डायबिटीज की, सभी ज्यादा तनाव होने से होती है। लेकिन क्या आपको पता है कि तनाव से एक फ़ूड डिसऑर्डर भी हो सकता है। इस फ़ूड डिसऑर्डर से आपका वजन भी बढ़ सकता है। इस फ़ूड डिसऑर्डर को स्ट्रेस ईटिंग कहते हैं। आइये इस बारे में विस्तार से जानते हैं। 

स्ट्रेस ईटिंग या इमोशनल ईटिंग का मतलब तनाव होने पर व्यक्ति द्वारा ज्यादा भोजन करने की आदत विकसित करना होता है। ऐसा देखा गया है कि लोग तनाव, तनाव के कारण रिलीज होने वाले केमिकल और हाई-फैट के प्रभाव, शुगर वाले "कम्फर्ट फ़ूड" के कारण बहुत ज्यादा खाने की आदत से पीड़ित हो जाते हैं जोकि बाद में चलकर एक गंभीर समस्या बन जाती है। कई रिसर्च में यह भी पता चला है कि तनाव ज्यादा होने से और स्ट्रेस ईटिंग से पीड़ित होने पर वजन बढ़ने की भी समस्या होती है। 

एड्रेनल ग्लैंड से रिलीज होने वाले हार्मोन से भूख लगती है कम या ज्यादा 

अक्सर ऐसा देखा गया है कि तनाव से कुछ समय के लिए भूख कम हो सकती है। तनाव के समय किडनी के ऊपर मौजूद एड्रेनल ग्लैंड को न्यूरोलॉजिकल सिस्टम से एपिनेफ्रिन हार्मोन को रिलीज करने के लिए सिग्नल मिलते हैं। एपिनेफ्रिन हार्मोन को एड्रेनलिन हार्मोन भी कहा जाता है। एपिनेफ्रिन जब रिलीज होता है तो शारीरिक स्थिति ऐसी हो जाती है कि कुछ समय के लिए भूख कम हो जाती है। 

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कोर्टिसोल हार्मोन के रिलीज होने से भूख बढ़ती है 

लेकिन समय के साथ अगर तनाव बना रहता है तो स्थिति बदल जाती है। कोर्टिसोल नाम का एक हार्मोन शरीर में रिलीज होता है। यह हार्मोन भी एड्रेनल ग्लैंड द्वारा रिलीज होता है। इस हार्मोन के रिलीज होने से भूख बढ़ जाती है। अगर कोई व्यक्ति तनाव में होता है तो उसका कोर्टिसोल का स्तर कम होना चाहिए, लेकिन अगर तनाव कम नहीं होता है या व्यक्ति लगातार तनाव से पीड़ित रहता है तो यह हार्मोन ज्यादा रिलीज होने लगता है जिससे स्ट्रेस ईटिंग या इमोशनल ईटिंग की समस्या पैदा होती है। 

तनाव होने पर व्यक्ति फास्ट फ़ूड ज्यादा खाने लगता है 

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जब व्यक्ति तनाव से पीड़ित होता है तो वह क्या खाना चाहता है, या उसकी खाने की पसंद क्या है, आदि चीजों पर भी प्रभाव पड़ता है। ऐसा हाई कोर्टिसोल लेवल के अलावा हाई इन्सुलिन लेवल के कारण भी होता है। घ्रेलिन को 'भूख हार्मोन यानि की हंगर हार्मोन के नाम से जाना जाता है।

जिन खाद्य पदार्थों में बहुत ज्यादा फैट और शुगर होता है, अगर उन्हें तनाव वाली अवस्था में खाया जाए तो व्यक्ति को लग सकता है कि उसमे तनाव कम हो रहा है। क्योंकि इन खाद्य पदार्थों से तनाव कम होना प्रतीत होता है इसलिए तनाव से पीड़ित व्यक्ति के लिए ये खाद्य पदार्थ 'कम्फर्ट फ़ूड' साबित हो सकते हैं। यही कारण है कि जब व्यक्ति तनाव से पीड़ित होता है तो उसमें हाई फैट और हाई शुगर वाले खाद्य पदार्थों को खाने का लालच बढ़ जाता है। 

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पुरुषों की तुलना में महिलाएं स्ट्रेस ईटिंग से होती हैं ज्यादा पीड़ित 

ऐसा देखा गया है कि पुरुषों के मुकाबले महिलाएं इस तरह के खाद्य पदार्थों को तनाव में ज्यादा खाती हैं। पुरुषों के केस में देखा गया है कि वे तनाव होने पर या तो स्मोकिंग करते हैं या शराब पीते हैं। इसके अलावा  5000 पुरुषों और महिलाओं पर किये गया एक अध्ययन में पता चला है कि पुरुष स्ट्रेस से सम्बन्धित ईटिंग की समस्या से ज्यादा पीड़ित नहीं होते हैं, महिलाएं इससे ज्यादा पीड़ित होती है इसलिए उनमे मोटापा होने का खतरा ज्यादा होता है। 
 

रिसर्च में शामिल जो ज्यादा वजन से पीड़ित लोग थे, उनमे उनके काम से तनाव और वजन बढ़ने से सम्बंधित अन्य समस्याएं थी। ज्यादा वजन वाले लोगों में इंसुलिन का लेवल ज्यादा होता है। इंसुलिन का लेवल ज्यादा होने से तनाव से संबंधित वजन बढ़ने की समस्या होने की सम्भावना भी बढ़ जाती है।

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बिना लगातार खाए तनाव को कैसे कम करें (how to control emotional eating)

जब तनाव से पीड़ित हो तो फ्रिज या रसोई में हाई फैट और ज्यादा शुगर वाले खाद्य पदार्थों को न रखें, इससे वजन बढ़ने की समस्या से छुटकारा पाया जा सकता है। आसपास 'कम्फर्ट फ़ूड' होने से स्ट्रेस ईटिंग समस्या होने की सम्भावना बढ़ जाती है। 


तनाव को कम करने के लिए कुछ और उपाय नीचे दिए गए हैं 

मेडिटेशन 

तनाव और मेडिटेशन को लेकर कई तरह के अध्ययन किये गए हैं। इन अध्ययनो से पता चला है कि मेडिटेशन करने से तनाव कम हो सकता है। जो लोग मेडिटेशन करते हैं वे किस चीज को खाना है और किस चीज नहीं खाना है इसका सही निर्णय लेने में ज्यादा सक्षम होते हैं। फैट और शुगर से भरपूर कम्फर्ट फ़ूड को मेडिटेशन करने से जल्दी पहचाना जा सकता है और इनके प्रभावों को कम किया जा सकता है। 

एक्सरसाइज 


जब कोई व्यक्ति एक्सरसाइज करता है तो उसमे तनाव से होने वाले कई खतरनाक परिणामों को कम किया जा सकता है। जितनी कम या ज्यादा आप एक्सरसाइज करते हैं उसी के अनुसार कोर्टिसोल लेवल कम या ज्यादा होता है। योग और ताई ची में एक्सरसाइज और मेडिटेशन दोनों के गुण होते हैं। 


सामाजिक समर्थन 

जब व्यक्ति अपने दोस्तों और परिवार के संपर्क में रहता है या उसे समाज के अन्य माध्यमों से सहयोग मिलता है तो उसका तनाव काफी हद तक कम हो जाता है। इस तथ्य पर कई अध्धयन हुए हैं जिसमे कहा गया है कि जिन्हें समाज से सहयोग मिलता और वे ज्यादा तनावपूर्ण माहौल जैसे कि अस्पताल के इमरजेंसी रूम में काम करते हैं उनमे तनाव कम रहता है और उनका मानसिक स्वास्थ्य बेहतर रहता है। जो लोग ऐसे माहौल में रहते हैं और काम करते हैं, उन्हें कभी-कभी दोस्तों और परिवार से मदद की जरुरत ज्यादा होती है।

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